शनिवार, 21 अगस्त 2010

जिंदगी को नया आयाम दो

मुरादो को फिर जीवन दान दो

पतझड़ से मत हो उदास

जज्बातों को उफान दो

सच है हलाहल है सागर में

पर अमृत भी है सागर मंथन में

मै सागर तुम बनो मौज

खुद को मुझ में उतार दो

करो दफ़न नाउम्मीदी

भटक कर विरानो में

न बुझाओ आशाओं की बत्ती

ख्वाबो को असमान दो

1 टिप्पणी:

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    धन्यवाद्
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