जिंदगी को नया आयाम दो
मुरादो को फिर जीवन दान दो
पतझड़ से मत हो उदास
जज्बातों को उफान दो
सच है हलाहल है सागर में
पर अमृत भी है सागर मंथन में
मै सागर तुम बनो मौज
खुद को मुझ में उतार दो
करो दफ़न नाउम्मीदी
भटक कर विरानो में
न बुझाओ आशाओं की बत्ती
ख्वाबो को असमान दो
आपका ब्लॉग देखा बहुत अच्छा लगा बहुत कुछ है जो में आपसे सिख सकता हु और भुत कुछ रोचक भी है में ब्लॉग का नया सदस्य हु असा करता हु अप्प भी मेरे ब्लॉग पे पदारने की क्रप्या करेंगे कुछ मुझे भी बताएँगे जो में भी अपने ब्लॉग में परिवर्तन कर सकूँगा में अपना लिंक निचे दे रहा हु आप देख सकते है
जवाब देंहटाएंhttp://dineshpareek19.blogspot.com/
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धन्यवाद्
दिनेश पीक