बुधवार, 11 अगस्त 2010

धरती क्या ,गगन क्या ,अमन क्या होता है
अब समझ गया ,तब मै पुष्प था
न समझा था चमन क्या होता है
अकड क्या ,शहर क्या ,जग क्या होता है
अब मै मनुज हूँ समझ गया मनुज क्या होता है
अपनी जिद और बचपन से मिलकर
tanaaw mukt umango के संग खेलता था
अपनत्व ,ममत्व की मिश्रित पवन में
पतंग सा लहराता था
पर आज में अपने ही अक्स से घबराता हूँ
लोग कहते है अब में बड़ा हो गया हूँ

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