मंगलवार, 29 जून 2010

मेरा बचपन जो मुझसे रूठ गया था

हालातो की कटीली झाड़ियो में छुट गया था

उस बचपन को जीने आता हूँ

आप मुझे आपने लगे थे

इस लीए अपन्त्व का रस पिने आता हूँ

आप के सामीप्य में गमो से दूर हुआ था

प्यार तो चंद पलोके लीए मिला

मगर भरपूर मिला था

आपने जितने भी हसीं पल दिए

उन पलो के लीए धन्यवाद् देता हूँ

अगर फुर्सत मिले तो हमें याद कर लेना

हम आज भी आप को यद् करते है

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