मेरा बचपन जो मुझसे रूठ गया था
हालातो की कटीली झाड़ियो में छुट गया था
उस बचपन को जीने आता हूँ
आप मुझे आपने लगे थे
इस लीए अपन्त्व का रस पिने आता हूँ
आप के सामीप्य में गमो से दूर हुआ था
प्यार तो चंद पलोके लीए मिला
मगर भरपूर मिला था
आपने जितने भी हसीं पल दिए
उन पलो के लीए धन्यवाद् देता हूँ
अगर फुर्सत मिले तो हमें याद कर लेना
हम आज भी आप को यद् करते है
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