तुम्हे देखे बगैर तुम पर कविता की
गुस्ताखी की है
गर आए पसंद कविता तो तारीफ़ की
ख्वाइश की है
तुम बिन्दाश हो ,तुम खुश मिजाज हो
भावनाओ के आनागिनित पुष्प
लीए आमलातास हो
तुम ईद हो तुम दीप हो
प्रीत की परिभाषा में तुम संगीत हो
तुम्हारे दिल के अंतर में उतरने की
हमने अजमाइश की है
न आए पसंद तो माफ़ी की
गुजारिश की है
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