बुधवार, 30 जून 2010
तो सजा का प्रतिरोध न करना
तुम्हे और औरत बना देता है
माँ बनी बहन बनी ,बनी तुम बेटी
पत्नी ,प्रेमिका
गम बाटती रही सबका
सुख बाटती रही अपने हिस्से का
कभी बाप कभी भाई .सिकार होती रही
पति और प्रेमी के गुस्से का
पर तुम्हे अब अपने अस्तित्व के लीए
लड़ना होगा ,समाज रूपी शिशुपाल की
कितनी ही ९९गालियों का हिशाब
बनके कृष्ण ललना होगा
फिर तुम्हारा महज औरत
होना सजा न होगा
मंगलवार, 29 जून 2010
चुनाव करीब आने लगे है
कुछ लोग हमारे क्षेत्र की खबर लगे है
वो करने लगे हम से वायदा
हमें वोट दो हम जित जायेंगे तो करेंगे
आपका फायदा
हमें तो उन पर भरोसा आता नहीं
हमने सोचा इनको कहाँ खोजेंगे
जब हमें आपने घर का पता नहीं
चुनाव हो जाने के बाद वही हुआ
जिसका हमें भय था
भगवान तो धरती पर दूध पि कर
अपनी मौजूदगी का प्रमाण दे गए
मगर हमारे क्षेत्र के नेता तो भगवान से बड़े
निकले जो चुनाव जितने के बाद अंतर्ध्यान हो गए
मेरा बचपन जो मुझसे रूठ गया था
हालातो की कटीली झाड़ियो में छुट गया था
उस बचपन को जीने आता हूँ
आप मुझे आपने लगे थे
इस लीए अपन्त्व का रस पिने आता हूँ
आप के सामीप्य में गमो से दूर हुआ था
प्यार तो चंद पलोके लीए मिला
मगर भरपूर मिला था
आपने जितने भी हसीं पल दिए
उन पलो के लीए धन्यवाद् देता हूँ
अगर फुर्सत मिले तो हमें याद कर लेना
हम आज भी आप को यद् करते है